Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, Verse 72
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 81, verse 72 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 72
संस्कृत श्लोक
दृश्यं पश्यन्त्यमात्मानं न द्रष्टा संप्रपश्यति ।
द्रष्टुर्हि दृश्यतापत्तौ सत्ताऽसत्तेव तिष्ठति ॥ ७२ ॥
हिन्दी अर्थ
द्रष्टा अपने को दृश्य देखता हुआ अपने
स्वरूप को नहीं देखता, द्रष्टा की दृश्यत्वापत्ति होने पर द्रष्टा की सत्ता असत् हो जाती है।
भाव यह कि द्रष्टा बहिर्मुख वृत्ति से दृश्य को देखता है और अन्तर्मुखदृष्टि से द्रष्टा को देखता
है, चित् की एक ही समय दृश्य ओर द्रष्टा इन दोनों के प्रति उन्मुखता नहीं हो सकती