Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, Verse 75
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 81, verse 75 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 75
संस्कृत श्लोक
सर्वं यथावद्विज्ञाय शुद्धसंविन्मयात्मना ।
वाचामविषयं स्वच्छं किंचिदेवावशिष्यते ॥ ७५ ॥
हिन्दी अर्थ
शुद्ध संविद्रूप आत्मा से इस सबका यथावत् ज्ञान
प्राप्त करके वाणियों का अविषय शुद्ध कुछ ही अवशेष रहता हे