Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, Verse 91
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 81, verse 91 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 91
संस्कृत श्लोक
अयं जगदणुर्नित्यमेतेनाणुसुमेरुणा ।
स्पन्दनं पवनेनेव स्वाङ्ग एव कृताकृतः ॥ ९१ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे पवन अपने ही शरीर में स्पन्द को उत्पन्न
कर देता है और लीन भी कर लेता है, वैसे ही इस आत्मरूप अणु सुमेरुने अपने शरीर में इस
जगद्रूप अणु को बहुत बार उत्पन्न किया ओर लीन भी किया