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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 82, Verse 20

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 82, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 82 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

आशरीरपरित्यागमिदानीं न मया नृप । हिंसनीयाः परप्राणास्तेनेदं मद्वचः शृणु ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

हे राजन्‌, अब मैं अपने शरीर के परित्याग तक प्राणियों की हत्या नहीं करूंगी, इसलिए मेरे इस वचन को सुनो