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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 82, Verse 21

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 82, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 82 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

हिमवान्नाम शैलोऽस्ति शरच्चन्द्रांशुनिर्मलः । य उत्तराशाहृदये स्पृष्टपूर्वापरार्णवः ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

राजन्‌, हिमालयनामक पर्वत है, जो शरत्काल की चाँदनी के समान शुभ्र है एवं उत्तर दिशा के मध्य में पूर्वं ओर पश्चिम सागर का अवगाहन कर स्थित हे