Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 83, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 83, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
वध्यलोकोपहारेण सा देवी परिपूज्यते ।
प्रतिमा सा स्थिताद्यापि चित्रस्था फलदायिनी ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
वध्य जनों की बलि से उस
देवीकी पूजा की जाती है, वह प्रतिमा आज भी वहाँ पर स्थित है, अन्यत्र भी यदि वह चित्र में
लिखित हो, तो भी उक्त फल देती है