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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 83, Verse 11

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 83, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

सकलकोमलमङ्गलकारिणी कवलिताखिलवध्यमहाजना । जयति सात्र किरातजनास्पदे परमबोधवती चिरदेवता ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

सम्पूर्ण लोगों को बालक, बछड़े, धन, धान्य आदि वैभव और सम्पत्तियाँ देनेवाली, सम्पूर्ण वध्यजनों को ग्रसनेवाली, परम बोधवती, चिरकाल से अनुवृत्त देवीरूपा वह कर्कटी किरातजनों के मण्डल में स्थित है