Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 84, Verse 1
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 84, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
एतत्ते कथितं सर्वं मयाख्यानमनिन्दितम् ।
कर्कट्या हिमराक्षस्या यथावदनुपूर्वशः ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स श्रीरामजी, मैंने आपसे हिमालय की राक्षसी कर्कटी का यह
अनिन्दित आख्यान आदि से अन्त तक यथावत् कहा
सर्ग सन्दर्भ
तिरासीवाँ सर्ग समाप्त चौरासीवाँ सर्म राक्षसी के कर्कटी नाम में हेतु, उपदेश से अर्थ की कल्पना ओर दृष्टान्त कथन का उपयोग कथन |