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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 84, Verse 11

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 84, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

बीजे यथाऽनन्यदपि फलाद्यन्यदिवोदितम् । चितौ तथाऽनन्यदपि चेत्यमन्यदिवोदितम् ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे बीज में फल आदि (अंकुर आदि) अभिन्न होता हुआ भी भिन्न-सा उदित होता है, वैसे ही चित्‌ में अन्य न होता हुआ भी यह चेत्य अन्य-सा उदित हुआ है