Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 84, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 84, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
तस्मादियमिति ब्रहन्व्यतिरेकार्थपञ्चमी ।
ननु किं विद्धि देवेशादभिन्नं सर्वमित्यपि ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी
ने कहा : भगवन्, यदि भेद असत् ही है, तो ब्रह्म से ही सब कुछ उत्पन्न हुआ, इस प्रकार की
आपकी उक्ति में तथा “तस्माद्वा एतस्मादात्मन आकाश: संभूतः* इत्यादि श्रुति में "तस्मात्"
यह भेदप्रतिपादिका पंचमी और सब परब्रह्म से अभिन्न ही हे, यह अभेदप्रतिपादक वाक्य
दोनों केसे ? यानी दोनों की उपपत्ति नहीं होती । तात्पर्य यह हुआ कि लक्ष्य ओर अलक्ष्य के
भेद तथा उनके प्रतियोगियों के अभाव में शब्द की प्रवृत्ति नहीं होगी, ऐसी अवस्था में लक्षण
द्वारा लक्ष्यबोधनरूप व्यवहार की असिद्धि होने से उपदेश ही नहीं बनेगा