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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 84, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 84, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । कुलानि सन्त्यनेकानि राक्षसानां स्वभावतः । तानि शुक्लानि कृष्णानि हरितान्युज्ज्वलानि च ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, राक्षसो के अनेक वंश हैं, उनमें कोई स्वभावतः सफेद हैं, कोई काले हैं, कोई हरे हैं और कोई उज्ज्वल हैं