Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 84, Verses 4–5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 84, verses 4–5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 4,5
संस्कृत श्लोक
कर्कटप्राणिसादृश्यात्कर्कटो नाम राक्षसः ।
बभूव तज्जा सा कृष्णा कर्कटी कर्कटाकृतिः ॥ ४ ॥
कर्कटीप्रश्नसंस्मृत्या मयैषा कथिता तव ।
अध्यात्मोक्तिप्रसङ्गेन विश्वरूपनिरूपणे ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
कर्कट के (केकड़े के) सदुश होने से एक राक्षस का नाम कर्कट पड़ा | उससे उत्पन्न हुई काली
कर्कट के समान आकृतिवाली वह राक्षसी कर्कटी कहलाई। विश्वरूप के (जगत्तत्त्वके) निरूपण
के प्रस्तुत होने पर अध्यात्मविषयक उक्तियों के सिलसिले में कर्कटी के प्रश्नों का स्मरण होने
से मैने इसका वर्णन आपसे किया