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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 85, Verse 28

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 85, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 85 · श्लोक 28

संस्कृत श्लोक

गन्धर्वनगरोद्यानलतावितानमालिनी । समुद्रभूमिनभसां पदवी प्रविराजते ॥ २८ ॥

हिन्दी अर्थ

समुद्र, भूमि ओर आकाशका आश्रयभूत जगत्‌ वितानो से (विस्तारो से) शोभित होनेवाली गन्धर्वनगर की उद्यानलता के समान शोभित है, वास्तविक नहीं हे । भाव यह कि प्रतिभासित जगत्‌ मिथ्या ही है