Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 87, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 87, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 87 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
तथैते भगवन्ब्रह्मन्ब्रह्मणो ब्राह्मणा दश ।
त एते दश संसारा मनोव्योमनि संस्थिताः ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे भगवन्, इस प्रकार ये दस ऐन्दव ब्राह्मण दस ब्रह्मा हो गये ।
उन दसो के मनोरूप आकाशमें ये दस ब्रह्माण्ड स्थित हैं