Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 87, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 87, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 87 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
अद्य प्रबुद्धे भवति स्रष्टुमिच्छति संसृतिम् ।
सुखेनैव क्रमेणोच्चैस्ते तथैव व्यवस्थिताः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
आज
जब आप प्रलयरूप रात्रि से जागे ओर आपने संसार की सृष्टि करने की इच्छा की, उस समय
भी वे उसी क्रम से स्थित हैं