Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 87, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 87, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 87 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
ततो रात्रिक्रमपरे सर्वां संहृत्य तां स्थितिम् ।
स्थिते त्वय्यात्मनि विभो ते तथैव व्यवस्थिताः ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर हे विभो, जब आप
रात्रि के अतिक्रमण की प्रतीक्षा कर रहे थे और सम्पूर्ण स्थिति का संहार करके योगनिद्रा से
आत्मा में स्थित थे, तब भी वे वैसे ही यानी सर्गदिव्यापार में व्यग्र होकर स्थित रहे