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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 88, Verse 11

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 88, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 88 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

यथाप्राप्तं हि कर्तव्यमसक्तेन सदा सता । मुकुरेणाकलङ्केन प्रतिबिम्बक्रिया यथा ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

इसलिए सत्पुरुष को आसक्ति किये बिना जो कर्तव्य प्राप्त हुआ हो, उसे करना चाहिए, जैसे कि कलंकरहित स्वच्छ दर्पण प्रतिबिम्बक्रिया को करता है