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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 88, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 88, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 88 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

सृष्टिं चेन्न करोषि त्वं महेश परमात्मनः । नित्यकर्मपरित्यागात्किमपूर्वमवाप्स्यसि ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

हे महेश, अपना नित्यकर्म सृष्टि अगर आप नहीं करेंगे, तो नित्यकमोकि परित्याग से अतिरिक्त और क्या अदृष्ट आपको प्राप्त होगा ?