Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 88, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 88, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 88 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
तव नित्यमसंसक्तं विनोदायैव केवलम् ।
इदं कर्तव्यमेवेति जगन्न तूद्यमेच्छया ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
आसक्तिरहित यह जगत्-सृष्टि करना मेरा
कर्तव्य ही है, यह सोचकर केवल मनोविनोद के लिए जगत्सृष्टिमें आपकी प्रवृत्ति होती है,
किसी अपनी स्वार्थ की अभिलाषा से नहीं