Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 88, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 88, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 88 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
सृजसीदं तथा देव विनोदायैव भूतप ।
पुनः संहृत्य संहृत्य दिनं दिनपतिर्यथा ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे
प्राणियों के पालक, फिर भी जैसे सूर्य दिन का संहार करके फिर दिन की सृष्टि करते हैं वैसे ही
आप विनोद के लिए ही सृष्टि करते हैं