Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 88, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 88, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 88 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
तत उक्तं मया तस्य चिरं संचिन्त्य चेतसा ।
भानो भानो वदाशु त्वं किमन्यत्संसृजाम्यहम् ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर उसके कथन को
बहुत देर तक अपने मन से विचारकर मैंने कहा : हे भानो, मैं और क्या सृष्टि करूँ, यह आप
मुझसे शीघ्र कहिए