Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 88, Verse 1

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 88, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 88 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीब्रह्मोवाच । ब्रह्माणो ब्राह्मणा भानुरित्युक्त्वा ब्रह्मणो मम । ब्रह्मन्ब्रह्मविदां श्रेष्ठ तूष्णीमेव बभूव सः ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

श्री ब्रह्माजी ने कहा : हे ब्रह्मज्ञानियो में श्रेष्ठ वसिष्ठजी, “हे ब्रह्मवित्तम ब्रह्माजी, वे दस ब्राह्मण ही दस ब्रह्मा हैं', ऐसा मुझसे कहकर भानु चुप हो गये

सर्ग सन्दर्भ

सत्तासीवाँ सर्ग समाप्त अड्जासीवाँ सर्ग ब्रह्मा की अनासक्ति से सृष्टि -सिद्धि का वर्णन तथा मन से दृढ़ बद्धमूल हुए कार्य की अन्य उपायों से अनिवृत्ति का वर्णन ।