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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 89, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 89, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 89 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

अहल्या पूर्वमिन्द्रस्य बभूवेष्टेत्यहल्यया । श्रुतं राजमहिष्याथ कथाप्रस्तावतः क्वचित् ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

पटरानी अहल्या ने कहीं पर कथा के प्रसंग से पहले अहल्या (गौतमपत्नी) इन्द्रकी इष्ट हुई थी, ऐसा सुना था