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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 89, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 89, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 89 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

सामान्यब्राह्मणा भूत्वा मनोभावनया किल । ऐन्दवा ब्रह्मतां याता मनसः पश्य शक्तताम् ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

मन की सामर्थ्य देखिए, एेन्दव साधारण ब्राह्मण होकर भी मनकी भावना से ब्रह्मा के पद को प्राप्त हुए