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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 89, Verse 25

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 89, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 89 · श्लोक 25

संस्कृत श्लोक

अथातिसुघनस्नेहनिरावरणचेष्टयोः । तयोरनयवृत्तान्तो राज्ञाकर्णि कटुव्यथः ॥ २५ ॥

हिन्दी अर्थ

तदुपरान्त अत्यन्त प्रगाढ स्नेह होने के कारण प्रकाशरूप से कामचेष्टावाले उन लोगों का दुर्विनय, जो कि अत्यन्त व्यथा पर्हुचानेवाला था, राजा के कानों तक पहुँचा