Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 89, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 89, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 89 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
तावुभावपि संत्यक्तौ हेमन्ते सलिलाशये ।
तुष्टौ जहसतुस्तत्र न खेदं समुपागतौ ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
उन दोनों को हेमन्त ऋतुमें तालाब में छोड़ा, फिर भी वे बड़े सन्तुष्ट होकर
हँसते थे, वहाँ उन्हे तनिक भी दुःख नहीं हुआ