Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 90, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 90, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 90 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
श्रीभानुरुवाच ।
सुघनस्नेहसंबद्धमनस्कावेव शापतः ।
पतितौ भूतले वृक्षविच्युताविव पल्लवौ ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
भानु ने कहा : ब्रह्मन्, अत्यन्त प्रगाढ स्नेह से जिनका मन सम्बद्ध है, ऐसे वे दोनों
शाप से वृक्ष से गिरे हुए पल्लवो की तरह पृथ्वी पर गिर पड़े यानी मर गये