Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 91, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 91, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 91 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
प्रतिभासमुपायाति यद्यदस्य हि चेतसः ।
तत्तत्प्रकटतामेति स्थैर्यं सफलतामपि ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
जो-जो वस्तु इस चित्त में
स्फुरण को प्राप्त होती है, वह सब आविर्भाव को, स्थिरता को और सफलता को प्राप्त होती
है