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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 91, Verse 27

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 91, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 91 · श्लोक 27

संस्कृत श्लोक

शुद्धचित्परमार्थैकरूपिणीत्येव भावनात् । जीवो भूयो मनो भूत्वा वेत्तीत्थं देहतां मुधा ॥ २७ ॥

हिन्दी अर्थ

परमार्थरूपिणी शुद्ध चिति ही इस प्रकार भावना करने से जीव, तदनन्तर मन होकर व्यर्थ इस प्रकार देहता का अनुभव करती है