Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 91, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 91, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 91 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
सर्वमैन्दवसंसारवदिदं भाति चिद्वपुः ।
संपन्नसंप्रबोधात्मा स्वप्नो दीर्घः स्वशक्तिजः ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
चिद्-
वपु चेतन परमात्मा ही एेन्दवों के संसार की नाई सर्वात्मरूप से प्रतीत होता है जैसे अपने
अज्ञान से उत्पन्न हुआ स्वप्न दीर्घकालिक होकर जाग्रतस्वरूप प्रतीत होता है वैसे ही
चैतन्यस्वरूप परमात्मा सर्वात्मरूप से प्रतीत होता है