Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 91, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 91, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 91 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
द्विचन्द्रविभ्रमाकारं तन्मात्राभासपूर्वकम् ।
ऐन्दवाम्बरवद्रूढं चित्तादेवाखिलं भवेत् ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
चूँकि सूक्ष्मतम वासनामय
शब्दतन्मात्राओं के अध्यास से इस जगत् की उत्पत्ति हुई है, इसलिए यह ऐन्दवों के चित्ताकाश
के समान ही उत्पन्न हुआ हे । यह दो चन्द्रमाओं के भ्रम के तुल्य असत् ही है