Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 91, Verse 38
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 91, verse 38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 91 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
चिद्भागोऽत्रावबोधांशो जडं चेत्यं हि दृश्यते ।
इति जीवो जगद्भान्तिं पश्यन्गच्छति लोलताम् ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
इसमें चिद्भाग ज्ञानांश है ओर चेत्यभाग
जड़ दिखाई देता है । इस प्रकार जगद्भ्रान्तिको देखता हुआ जीव चंचलता को प्राप्त होता है
यानी इसमें चैतन्यरूप आत्मांश की विस्मृति होनेसे जडस्वरूप जीव-जगत्का भ्रम उत्पन्न
हुआ है