Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 91, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 91, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 91 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
स्वमेवान्यतया दृष्ट्वा चितिर्दृश्यतया वपुः ।
निर्भागाप्येकभागाभं भ्रमतीव भ्रमातुरा ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
निर्विभाग भी चेतन अन्यरूप दृश्यरूप से स्वगतभेदतुल्य
अपने शरीर को देखकर भ्रमसे आर्त होकर भटकता हे