Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 91, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 91, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 91 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
न भ्रान्तिरस्ति भ्रमभाङ्गा नैवेतीह निश्चयः ।
परिपूर्णार्णवप्रख्यावेतीत्थं संस्थिता चितिः ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
वास्तव में यहाँ न भ्रान्तिहे, न
भ्रान्तियुक्त पुरुष है, यह निश्चय है, किन्तु परिपूर्ण सागर के तुल्य स्थित हुई चिति ही
जगद्भ्रान्ति आदिरूप से जानती है यानी अनुभव करती है