Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 91, Verse 47
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 91, verse 47 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 91 · श्लोक 47
संस्कृत श्लोक
मनः पदार्थादितया सर्वरूपं विजृम्भते ।
नानात्माचित्तदेहोऽयमाकाशविशदाकृतिः ॥ ४७ ॥
हिन्दी अर्थ
पदार्थ आदिरूप
से सर्वरूप मन ही वृद्धि को प्राप्त होता है, नाना प्रकार का चित्रूपी यह आतिवाहिक देह
आकाश के समान निर्मलाकृति हे