Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 91, Verse 50
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 91, verse 50 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 91 · श्लोक 50
संस्कृत श्लोक
यद्विद्यते शोध्यते तद्बोधः के च खपादपाः ।
देहाद्यविद्या सत्या चेद्युक्त एतां प्रति ग्रहः ॥ ५० ॥
हिन्दी अर्थ
देह आदि असत् है, इसलिए भी वे शोधनयोग्य नहीं है, ऐसा कहते है।
जो वस्तु वर्तमान रहती हे, उसका शोधन होता हे, उसका शोधन फलवान् है, आकाश में
कल्पित वृक्षोंको शोधे जाते किसने देखा ? यदि देहादि अविद्या सत्य हो, तो उसका शोधन हो
सकता हे