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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 91, Verse 51

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 91, verse 51 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 91 · श्लोक 51

संस्कृत श्लोक

असत्यविनिविष्टानां देहवाचितया त्विह । ये नामोपदिशन्त्यज्ञाः किंचित्ते पुरुषैडकाः ॥ ५१ ॥

हिन्दी अर्थ

अतएव आत्मा आदि शब्द देह में प्रयुक्त किये गये भी श्रुतिमें देहवाची नहीं देखे गये, क्योकि श्रुति असत्य अर्थ का प्रतिपादन नहीं करती है, जो असत्य का आग्रह करनेवाले देहमें दृढ़ आत्मबुद्धि करनेवाले चार्वाक आदि पामर हें, वे आत्मादि देहवाची ही हैं, ऐसा कहते हैं। जो उनकी प्रामाणिक वस्तु का तनिक भी उपदेश करते हैं, वे पुरुशपशु हैं