Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 91, Verse 52

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 91, verse 52 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 91 · श्लोक 52

संस्कृत श्लोक

यथैतद्भावयेत्स्वान्तं तथैव भवति क्षणात् । दृष्टान्तोऽत्रैन्दवाहल्याकृत्रिमेन्द्रादिनिश्चयाः ॥ ५२ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि कोई कहे अमूर्त चित्त मूर्त देहभाव को कैसे प्राप्त हुआ ? तो उसकी भावना से ही प्राप्त हुआ, ऐसा कहते हैं। यह मन जैसी भावना करता है, तुरन्त वैसा ही हो जाता है, यहाँ पर ऐन्दव अहल्या और कृत्रिम इन्द्र आदि के निश्चय दृष्टान्त हे