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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 92, Verse 1

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 92, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । इत्युक्तवान्स भगवान्मया कमलसंभवः । रघूद्वह पुनः पृष्टो वाक्यमाक्षिप्य भूतपः ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे रघुकुलदीपक, भगवान्‌ ब्रह्माजी ने मुझसे यह सब कहा। मैंने उनके पूर्वकथित वाक्य में अनुपपत्ति दर्शा कर फिर उनसे पूछा

सर्ग सन्दर्भ

इक्यानबेवाँ सर्ग समाप्त बानबेवाँ सर्ग पुनः शंका कर मन की अमोघ शक्ति की दृढ़रूप से स्थापना का तथा पुरुषप्रयत्न की दृढता होने पर यथेष्ट कार्याचरण में सामर्थ्य का वर्णन ।