Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 92, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 92, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
त्वयैव भगवन्प्रोक्ताः शापमन्त्रादिशक्तयः ।
अमोघा इति ता एव कथं मोघाः कृताः पुनः ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
भगवन्, आपने ही
शाप, मन्त्र आदि की शक्तियाँ अमोघ हैं, ऐसा कहा है, फिर आपने ही उन्हें मोघ (व्यर्थ)
कैसे कर डाला ?