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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 92, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 92, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

एकं मनःशरीरं तु क्षिप्रकारि सदा चलम् । अकिंचित्करमन्यत्तु शरीरं मांसनिर्मितम् ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

उनमें एक तो मनोमय शरीर है, जो शीघ्र कार्य करनेवाला और सदा चंचल है । दूसरा मांसमय शरीर है, जो अकिंचित्कर है