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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 92, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 92, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

आब्रह्म स्थावरान्तं च सर्वदा सर्वजातयः । सर्व एव जगत्यस्मिन्द्विशरीराः शरीरिणः ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

मेरा पूर्व कथन स्थूलका ही विनाश देखा गया है, यूक्ष्मका नहीं, इस लोकढ्ष्ट के अनुसार है, यह कहने के लिए भिन्न स्वभाववाले दो देहों को दशति है। इस जगत्‌ में ब्रह्मा से लेकर स्थावरपर्यन्त सदा समस्त जातियाँ ओर सब प्राणी दो शरीरवाले हैं