Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 92, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 92, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

ब्रह्मोवाच । न तदस्तिजगत्कोशे शुभकर्मानुपातिना । यत्पौरुषेण शुद्धेन न समासाद्यते जनैः ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

पहले विरोध को दूर करने के लिए वर और शाप की प्रबलतोक्तिकी ओत्सर्गिकता बहूधा दष्ट होनेके कारण अवश्य माननी चाहिए । इसकी उपपत्ति करने के लिए कर्म से उपोद्रलित पौरुषप्रबलताका, जो वर और शाप की भी हेतु है, स्मरण कराते हैं। श्री ब्रह्माजी ने कहा : ब्रह्माण्ड में ऐसी कोई वस्तु नहीं है, जो शुभ कर्मानुसारी शुद्ध पौरुष से मनुष्यों को प्राप्त न हो सके