Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 92, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 92, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
ये चापि खण्डिताः केचिच्छापाद्यैराधिसायकैः ।
स्वविवेकाक्षमं तेषां मनो मन्ये विपौरुषम् ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
जो कोई (राजा सौदास, नहुष, विश्वामित्र आदि)
शाप, काम, क्रोध आदि मानसिक व्यथा रूपी बाणोंसे खण्डित हुए, उनका मन उपासना में
अदृढपोरुष वाला ओर ज्ञानमें भी असमर्थ था, ऐसा मेरा तर्कं है