Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 92, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 92, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
न कदाचन संसारे सावधानमना मनाक् ।
स्वप्नेऽपि कश्चिदृश्ये वा दोषजालैः खिलीकृतः ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
विवेक और पौरुष से दृढ़ मनमें तो इच्छित पदार्थ की क्षति नहीं होती, ऐसा कहते हैं ।
इस संसार में सावधान मनवाला कोई भी पुरूष स्वप्न में अथवा जाग्रत में कभी भी दोषों से
जरा भी जड़ीभूत नहीं हुआ