Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 93, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 93, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
एषा जगज्जाङ्गलजीर्णवल्ली सम्यक्समालोककुठारकृत्ता ।
वल्लीव विक्षुब्धमनःशरीरा भूयो न संरोहति रामभद्र ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, इस संसाररूपी जंगल की जीर्ण-शीर्ण लताका विक्षुब्ध मन
ही शरीर है। यदि यह तत्त्वज्ञानरूपी कुल्हाड़ी से काट दी जाय, तो जैसे कटी हुई लता फिर
नहीं पनपती वैसे ही फिर नहीं पनपती है