Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 93, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 93, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
तन्मनस्तन्मात्रकल्पनपूर्वकसन्निवेशं भवति ततस्तैजसः पुरुषः संपद्यते सोऽयं ब्रह्मेत्यात्मनि नाम कृतवान् ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त मन तन्मात्ररूप सूक्ष्म भूतों की कल्पनापूर्वक स्वाप्न शरीर के समान
वासनामय पुरुष का आकार धारण करता है। उस वासनामय पुरुषाकाररूपी उपाधि से उपहित
आत्मा तेजप्रधान लिंगशरीरसमष्टिरूप उपाधिवाला होने से तैजस हो जाता है । उसीने अपना
ब्रह्मा" यह नाम किया