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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 94, Verses 30–31

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 94, verses 30–31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 94 · श्लोक 30

संस्कृत श्लोक

शीतरश्मेरित ज्योत्स्ना स्वालोक इव तेजसः । एवमेता हि भूतानां जातयो विविधाश्च याः ॥ ३० ॥ यस्मादेव समायान्ति तस्मिन्नेव विशन्ति च । काश्चिज्जन्मसहस्रान्ते जातयश्चिरकालिकाः । काश्चित्कतिपयातीतजन्मरूपा व्यवस्थिताः ॥ ३१ ॥

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार ये विविध प्राणियों के वर्ग जिससे उत्पन्न होते हैं, उसीमें उपाधि के लयसे अभेद को प्राप्त हो जाते हैं