Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 95, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 95, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 95 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
द्वयं हि दृष्टिर्बालानां सिद्धये सर्वकर्मणाम् ।
साधुवृत्तं तथा शास्त्रं सर्वदैवानुवर्तते ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
पूर्वोक्त
लक्षणवाले सन््तों का सदाचार और श्रुतिस्मृतिरूप शास्त्र ये दो ही जिन्हें आत्मतत्त्व का ज्ञान
नहीं हुआ, उन शिष्टों के सब कर्मोकी सिद्धि के लिए यानी धर्मतत्त्व ओर ब्रह्मतत्त्व के ज्ञान के
लिए सदा दो नेत्र हैं