Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 95, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 95, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 95 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
महासत्त्वगुणोपेता ये धीराः समदृष्टयः ।
अनिर्देश्यकलोपेताः साधवस्त उदाहृताः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
इसी प्रकार सदाचार भी प्रमाण है, यह कहने के लिए सन्तो का लक्षण कहते हैं।
जो अत्यन्त विशुद्ध सत्त्वगुणसे युक्त हैं, दुःखदायी विषयों से विचलित नहीं हो सकते हैं,
राग, द्वेष आदि से रहित हैं एवं शब्द से जिसका निर्वचन नहीं हो सकता, ऐसी निरतिशय
आनन्दरूप ब्रह्म की साक्षात्कारकला से सम्पन्न हैं, वे सन्त कहे गये हैं